कांग्रेस पार्टी की निर्लज्जता थमने का नाम नहीं ले रही हैं. कांग्रेस पार्टी,इसके नेता और इसके समर्थक ईरान के मुस्लिम शासक खेमनाई की मौत पर मातम मनाकर अपने मानसिक दिवालियेपन का सबूत दे रहे हैं. पूरी दुनिया खेमनाई को एक वहशी दरिंदे के रूप में जानती हैं जो अपने देश क़ी महिलाओं पर भयंकर अत्याचार करता था. सजा के तौर पर महिलाओं को नंगा करके उन्हें कोड़े लगाए जाते थे और उनका गैंग रेप किया जाता था. खेमनाई कितना बड़ा हैवान था, इसके बारे में एमनेस्टी इंटरनेशनल क़ी रिपोर्ट में भी साफ़ साफ़ लिखा हुआ हैं लेकिन कांग्रेस पार्टी के मानसिक दिवालियेपन का आलम यह हैं कि यह सब कुछ जानते समझते हुए भी खेमनाई जैसे दरिंदे की मौत पर अपनी छाती पीट रही हैं. कांग्रेस की नेता सोनिया गाँधी जो खुद एक महिला हैं, वह महिलाओं पर अत्याचार करने वाले खेमनाई के समर्थन में अंग्रेजी के अखबार में एक शर्मनाक लेख लिखकर आखिर क्या साबित करना चाहती हैं?
ईरान के सर्वोच्च नेता अली खेमनाई का शासन महिलाओं और नागरिकों के लिए दमन और भय का प्रतीक रहा। एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्टें बार-बार यह उजागर करती रही हैं कि खेमनाई के शासन में महिलाओं को जबरन हिजाब पहनने के लिए बाध्य किया गया, विरोध करने पर उन्हें गिरफ्तार किया गया, यातनाएँ दी गईं और कठोर सज़ाओं का सामना करना पड़ा। “महिला, जीवन, स्वतंत्रता” आंदोलन के दौरान हजारों महिलाओं को केवल अपने अधिकारों की मांग करने पर जेल में डाल दिया गया। यह शासन मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन था।
इतना ही नहीं, खेमनाई की नीतियाँ भारत के हितों के खिलाफ भी रही हैं। भारत के रणनीतिक साझेदारों – अमेरिका और इज़राइल – के खिलाफ खेमनाई का लगातार विरोध भारत की सुरक्षा और कूटनीतिक हितों को कमजोर करता रहा। भारत के साथ सहयोग करने के बजाय, ईरान ने कई मौकों पर भारत विरोधी रुख अपनाया। ऐसे व्यक्ति को भारत का मित्र मानना तो दूर, उसकी मौत पर शोक व्यक्त करना किसी भी भारतीय राजनीतिक दल के लिए शर्मनाक है।
लेकिन आश्चर्यजनक रूप से भारत की विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने खेमनाई की मौत पर दुःख व्यक्त किया। यह रुख न केवल महिलाओं के संघर्ष का अपमान है, बल्कि भारत के राष्ट्रीय हितों की भी अवहेलना है। जब पूरी दुनिया खेमनाई के दमनकारी शासन की आलोचना कर रही है, तब कांग्रेस का मातम मनाना यह सवाल उठाता है कि क्या पार्टी मानवाधिकारों और राष्ट्रीय हितों से ऊपर किसी और एजेंडे को प्राथमिकता दे रही है।
कांग्रेस का यह रवैया उन भारतीय नागरिकों के लिए भी अस्वीकार्य है जिन्होंने हमेशा लोकतंत्र और मानवाधिकारों के पक्ष में आवाज़ उठाई है। एक ऐसे शासक के लिए सहानुभूति दिखाना, जिसने महिलाओं को कोड़े मारने जैसी अमानवीय सज़ाएँ दीं और नागरिकों की स्वतंत्रता छीन ली, कांग्रेस की राजनीतिक समझ और नैतिकता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
और भी चिंताजनक बात यह है कि भारत में कुछ लोग, विशेषकर मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्ग, खेमनाई की मौत पर मातम मना रहे हैं। यह व्यवहार न केवल उन ईरानी महिलाओं के संघर्ष का अपमान है जिन्होंने अपने अधिकारों के लिए जान की बाज़ी लगाई, बल्कि भारत के प्रति भी गद्दारी जैसा है। भारत में रहते हुए, भारत की आज़ादी और लोकतंत्र का लाभ उठाते हुए, किसी विदेशी दमनकारी शासक के लिए शोक मनाना देशभक्ति के मूल्यों के खिलाफ है।
भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र है जहाँ हर नागरिक को स्वतंत्रता और अधिकार प्राप्त हैं। ऐसे में किसी विदेशी तानाशाह के लिए सहानुभूति दिखाना यह दर्शाता है कि कुछ लोग भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और राष्ट्रीय हितों को महत्व नहीं देते। यह मानसिकता खतरनाक है और इसे सख्ती से चुनौती दी जानी चाहिए।
खेमनाई की मौत पर मातम मनाना उन महिलाओं और नागरिकों के संघर्ष का अपमान है जिन्होंने उसके शासन में अत्याचार सहे। कांग्रेस पार्टी का यह रवैया भारतीय राजनीति में नैतिक दिवालियापन का प्रतीक है। और भारत में रहने वाले वे लोग जो खेमनाई के लिए शोक मना रहे हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि यह व्यवहार भारत के प्रति गद्दारी है। भारत के नागरिकों और राजनीतिक दलों को यह स्पष्ट करना होगा कि वे मानवाधिकारों और राष्ट्रीय हितों के साथ खड़े हैं,न कि किसी विदेशी दमनकारी शासक के साथ।
आज भारत में खेमनाई जैसे हैवान के समर्थन में जो कोई भी खड़ा हैं, वह खेमनाई से बड़ा हैवान हैं और सरकार को चाहिए की उस हैवान को वहीं पहुंचा दिया जाए, जहां खेमनाई गया हैं.
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