Justice Yashwant Verma: हाल ही में, केंद्रीय कानून मंत्री ने संसद में यह बयान दिया कि सरकार को न्यायाधीशों के खिलाफ भ्रष्टाचार की 1,631 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिन पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इस बयान ने न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही पर एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म दिया है। इसी संदर्भ में, दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर आग लगने के बाद भारी मात्रा में नकदी मिलने की घटना ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है।
घटना का विवरण:
14 मार्च 2025 को होली की रात लगभग 11:35 बजे, न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के लुटियंस दिल्ली स्थित सरकारी आवास में आग लग गई। दमकल कर्मियों ने आग बुझाने के दौरान एक कमरे में भारी मात्रा में नकदी बरामद की, जिसमें कई नोट जलकर राख हो गए थे, जबकि कुछ अभी भी जल रहे थे। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें जलते हुए नोटों की गड्डियां स्पष्ट रूप से देखी जा सकती हैं।
प्रारंभिक कार्रवाई:
इस घटना की सूचना मिलते ही, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की आपात बैठक बुलाई। कॉलेजियम ने सर्वसम्मति से न्यायमूर्ति वर्मा को उनके मूल उच्च न्यायालय, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय न्यायपालिका की साख और जनता के विश्वास को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया।
आंतरिक जांच की पहल:
Justice Yashwant Verma: स्थानांतरण के अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय आंतरिक समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्सिट शील नागू करेंगे, जबकि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्सिट जी.एस. संधावालिया और कर्नाटक उच्च न्यायालय की न्यायाधीश जस्सिट अनु शिवरामन सदस्य के रूप में शामिल हैं। इस जांच के दौरान, न्यायमूर्ति वर्मा को न्यायिक कार्यों से अलग रखा गया है।
न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता:
केंद्रीय कानून मंत्री के बयान और न्यायमूर्ति वर्मा के मामले ने न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को उजागर किया है। भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष और त्वरित जांच सुनिश्चित करने के लिए एक सुदृढ़ प्रणाली की आवश्यकता है, ताकि न्यायपालिका में जनता का विश्वास बना रहे।
निष्कर्ष:
Justice Yashwant Verma: न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के आवास पर नकदी मिलने की घटना और केंद्रीय कानून मंत्री द्वारा उजागर की गई भ्रष्टाचार की शिकायतें न्यायपालिका में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं। इन घटनाओं के माध्यम से, यह स्पष्ट होता है कि न्यायपालिका में पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिकता को बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि जनता का न्याय प्रणाली में अटूट विश्वास बना रहे।
Justice Yashwant Verma के घर से जो करोड़ों रुपये नकद बरामद हुए हैं, उसे देखते हुए केंद्र सरकार को तुरंत एक्शन में आते हुए न्यायपालिका के भ्रष्टाचार पर अपना शिकंजा कस देना चाहिए.संविधान में “न्यायपालिका की स्वतंत्रता” के नाम पर जो “भ्र्ष्टाचार करने की स्वतंत्रता” इन जजों को मिली हुई है, उसे ख़त्म करके असंवैधानिक कॉलेजियम सिस्टम पर तुरंत रोक लगनी चाहिए. जजों की नियुक्ति और उन्हें नौकरी से निकालने के लिए वही नियम कानून सरकार को पालन करने चाहिए जो अन्य सरकारी अधिकारियों की नियुक्ति के लिए लागू होते हैं.
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