भारत के विपक्षी दलों द्वारा “डीप स्टेट” और अमेरिका की बिडेन सरकार से मिलकर मोदी सरकार का तख्ता पलट करने की साज़िश !

2014 में  नरेंद्र  मोदी  के सत्ता  में आने के बाद से ही देश के सभी विपक्षी दल पूरी तरह से बौखलाए हुए हैं क्योंकि इनके हाथ से सत्ता जाने के कारण जिस तरह से बेलगाम होकर यह विपक्षी दल भ्रष्टाचार,देशद्रोह और गुंडागर्दी को अंजाम दे रहे थे, उस पर अब काफी हद तक रोक लग गयी है. इन भ्रष्ट और देशद्रोही विपक्षी नेताओं और उनकी पार्टियों को सपोर्ट करने वाले दरबारी पत्रकार भी मोदी सरकार और भाजपा से इसलिए खफा हैं क्योंकि अब इनके आकाओं के हाथों से सत्ता खिसकने की वजह से भ्रष्टाचार की लूटपाट में जो हिस्सा इन लोगों को मिल रहा था, वह भी मिलना अब बंद हो चुका है.

लेकिन विपक्षी दलों और उनके समर्थकों  के मुंह खून लग चुका है और वह भ्रष्टाचार का मोटा माल मिलने की वजह सेजल बिन मछलीकी तरह तड़प रहे हैं. इन भ्रष्ट देशद्रोहियों की यह तड़प सिर्फ देश की सत्ता हथियाकर ही ख़त्म हो सकती है जिसके लिए देश की जनता अब तैयार नहीं है क्योंकि देश की जनता के सामने इन देशद्रोही और भ्रष्ट विपक्षी नेता पूरी तरह बेनकाब हो चुके हैं. जिन राज्यों में विपक्षी दलों की (गैर भाजपा) सरकारें हैं, वहां जिस तरीके से कामकाज चल रहा है, उसे देखकर ही यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इन लोगों के हाथ अगर केंद्र की सत्ता गलती से भी लग गयी तो यह देश को पूरी तरह बर्बाद करने के कोई भी कोर कसर उठा नहीं रखेंगे.

अपनी इस सत्ता की भूख को मिटाने के लिए इन्होने अमेरिका की बाइडेन सरकार से मिलकर डीप स्टेट के जरिये मोदी सरकार का तख्ता पलट करने की भी साज़िश को अंजाम दिया था जिसमे यह लोग कामयाब नहीं हुए और 2024 में एक बार फिर मोदी की सरकार बनने में कामयाब हो गयी.

देश के प्रमुख विपक्षी दलों के कई नेता बार बार अज्ञात कारणों से विदेश यात्रायें करके जिस तरह से मोदी सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश करते हैं, वह सब इसी साज़िश का हिस्सा है.

भारतीय राजनीति में साजिशों और षड्यंत्रों की कहानियाँ कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन हाल ही में यह आरोप सामने आया है कि भारत के विपक्षी दलों ने अमेरिका की बिडेन सरकार और वहां के डीप स्टेट के जरिये मोदी सरकार का तख्तापलट करने की साजिश रची। यह आरोप जितना गंभीर है, उतना ही इसकी पड़ताल आवश्यक भी है। क्या वास्तव में यह साजिश संभव थी, या यह मात्र एक राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा है? इस लेख में हम इस विषय पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

डीप स्टेट: एक परिचय

डीप स्टेटशब्द का प्रयोग आमतौर पर उन गुप्त शक्तियों के लिए किया जाता है, जो किसी देश की सरकार और लोकतांत्रिक प्रणाली के पीछे रहकर नीतियों और घटनाओं को प्रभावित करती हैं। अमेरिका में डीप स्टेट को वहाँ की खुफिया एजेंसियों, सैन्य प्रतिष्ठानों, नौकरशाही और कुछ कॉर्पोरेट समूहों का संयुक्त तंत्र माना जाता है, जो अपने आर्थिक और राजनीतिक हितों की रक्षा के लिए सरकार की दिशा को नियंत्रित करने का प्रयास करता है।

अमेरिका में डीप स्टेट का प्रभाव कई बार देखा गया है, खासकर विदेश नीति और सैन्य अभियानों में। यदि भारत के संदर्भ में बात करें, तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अमेरिका का डीप स्टेट वास्तव में भारतीय राजनीति में हस्तक्षेप करने में सक्षम है और यदि हाँ, तो उसके संभावित उद्देश्य क्या हो सकते हैं।

विपक्षी दलों और अमेरिका की भूमिका

भारत में नरेंद्र मोदी की सरकार को 2014 और 2019 के आम चुनावों में भारी जनसमर्थन मिला था। उनकी सरकार की नीतियाँजैसे आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, और डिजिटल इंडियाने वैश्विक स्तर पर भारत को एक उभरती हुई शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया। लेकिन इस दौरान कई विपक्षी दल, विशेष रूप से कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अन्य क्षेत्रीय दल, लगातार मोदी सरकार की नीतियों की आलोचना करते रहे हैं।

कुछ रिपोर्ट्स और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत के कुछ विपक्षी दल अमेरिकी प्रशासन से करीबी संबंध बना रहे थे, खासकर जब जो बिडेन राष्ट्रपति बने। अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी और भारतीय विपक्षी दलों के बीच बढ़ते संबंधों को कई विश्लेषकों ने संदेह की दृष्टि से देखा है। अमेरिका की कई संस्थाएँ, जैसे कि ह्यूमन राइट्स वॉच और फ्रीडम हाउस, लगातार मोदी सरकार की आलोचना करती रही हैं।

इसके अलावा, भारतीय विपक्षी नेताओं की अमेरिका और यूरोप की यात्राएँ और वहाँ के मीडिया में मोदी सरकार के खिलाफ दिए गए बयान भी सवाल खड़े करते हैं। राहुल गांधी द्वारा बारबार अमेरिका और ब्रिटेन में जाकर मोदी सरकार की आलोचना करना इस संदर्भ में उल्लेखनीय है।

अमेरिका की भारत में रुचि और संभावित हस्तक्षेप

अमेरिका के लिए भारत एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है, लेकिन कुछ मुद्दों पर दोनों देशों के दृष्टिकोण भिन्न रहे हैं। रूस से भारत के संबंध, भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और चीन के साथ संतुलन बनाकर चलने की रणनीति अमेरिका को हमेशा पसंद नहीं आई। यदि अमेरिका की बिडेन सरकार या डीप स्टेट मोदी सरकार को अस्थिर करना चाहती थी, तो इसके पीछे निम्नलिखित कारण हो सकते हैं:

  1. रूस से करीबी संबंध: भारत रूस से रक्षा उपकरण खरीदता है और यूक्रेन युद्ध के दौरान भी भारत ने रूस के खिलाफ किसी प्रकार की नीति नहीं अपनाई। यह अमेरिका को असहज करता है।
  2. चीन के प्रति भारत की संतुलित नीति: अमेरिका चाहता है कि भारत खुलकर चीन के खिलाफ खड़ा हो, लेकिन भारत अपनी स्वायत्त नीति बनाए हुए है।
  3. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और कॉर्पोरेट हित: कई अमेरिकी कॉर्पोरेट समूह चाहते हैं कि भारत अपनी व्यापार नीति को अमेरिका के अनुकूल बनाए, लेकिन मोदी सरकार ने घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने की रणनीति अपनाई है।
  4. हिंदुत्व की नीति: बिडेन प्रशासन और डेमोक्रेटिक पार्टी को मोदी सरकार की हिंदुत्व आधारित राजनीति और नीतियाँ रास नहीं आतीं, क्योंकि वे इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों के विरुद्ध मानते हैं।

क्या मोदी सरकार को अस्थिर करने की योजना थी?

हालांकि यह स्पष्ट रूप से साबित नहीं हुआ कि कोई संगठित साजिश थी, लेकिन कई घटनाएँ इस ओर इशारा करती हैं कि अमेरिका की बिडेन सरकार और कुछ विपक्षी दलों के बीच गुप्त सहमति थी। सोशल मीडिया पर मोदी सरकार के खिलाफ अमेरिकी मीडिया की नकारात्मक रिपोर्टिंग, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि खराब करने के प्रयास और विपक्षी दलों की विदेश यात्राएँ इन आरोपों को बल देती हैं।

हाल के वर्षों में, भारत में कुछ बड़े प्रदर्शन हुए, जैसे कि कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी प्रदर्शन। इन प्रदर्शनों में विदेशी फंडिंग और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की भूमिका भी चर्चा का विषय रही है।

निष्कर्ष

भारतीय राजनीति में बाहरी हस्तक्षेप और विपक्षी दलों की अंतरराष्ट्रीय रणनीति को लेकर संदेह बना हुआ है। हालाँकि, किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार के खिलाफ विरोध और आलोचना स्वाभाविक है, लेकिन जब विदेशी ताकतें इसमें हस्तक्षेप करने लगें, तो यह देश की संप्रभुता के लिए खतरा बन सकता है।

यह आवश्यक है कि भारत सरकार अपनी आंतरिक सुरक्षा और विदेश नीति को इस प्रकार मजबूत बनाए कि बाहरी हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश बचे। साथ ही, विपक्षी दलों को भी यह समझना होगा कि विदेशी ताकतों के समर्थन से सत्ता प्राप्त करने का प्रयास देश के दीर्घकालिक हितों के लिए हानिकारक हो सकता है।

अंततः, यह भारतीय जनता पर निर्भर करता है कि वे ऐसी किसी भी संभावित साजिश को पहचानें और राष्ट्रहित में सही निर्णय लें।भारत सरकार को चाहिए कि वह इन भ्रष्ट और देशद्रोही विपक्षी नेताओं के साथ सख्ती से पेश आये और इन पर देशद्रोह का मामला दर्ज़ करके इन्हे सख्ती से दण्डित करे. देश में न्यायिक सुधारों के बिना और कॉलेजियम सिस्टम को ख़त्म किये बिना इन  भ्रष्ट  और देशद्रोही विपक्षी नेताओं को सजा देने में अगर सरकार को अड़चन महसूस हो रही हो तो न्यायिक सुधारों को भी तुरंत अमल लाने में भी सरकार को देर नहीं लगानी चाहिए.

Read Also:

यस बैंक शेयर प्राइस टारगेट 2025,2030,2035,2040 – News4You

How to make maximum profit with minimum investment from the Stock Market ? – MoneyInsight

Also Read :                                             

How to make money from share market? (indiatimes.com)

Visit our Website regularly for more such Educational Research Articles:

News4You – News & Views On Current Affairs

Author

Leave a Comment